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पूर्व छात्र मिलन समारोह 2026: यादों के सफर में लौटे मंत्री अनिल विज

‘एसडीयंस यादें’ समारोह में पहुंचे ऊर्जा मंत्री अनिल विज; 10 लाख रुपए अपने स्वैच्छिक कोष से दिए

कलम बाण अंबाला
मिलन सिंह : हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि जिस शिक्षण संस्थान में हम शिक्षा पूर्ण कर जब आगे निकल जाते हैं तो दिल का एक टुकड़ा वहीं पीछे रह जाता है जो समय-समय पर हम कहीं पर भी हो, वह हमें वापस खींचता रहता है। यहीं कारण है जब पूर्व छात्र मिलन समारोह जैसे आयोजन होते है तो घड़ी की सूई उलटी घूम जाती है।

श्रीविज गत देर शाम सनातन धर्म कॉलेज, अंबाला छावनी में ‘एसडीयंस यादें’ पूर्व छात्र मिलन समारोह 2026 में बोल रहे थे। इस अवसर पर कॉलेज के पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा वर्तमान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को यादगार बनाया। वहीं ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कार्यक्रम के आयोजन कमेटी को अपने स्वैच्छिक कोष से दस लाख की राशि प्रदान की।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि कालेज में बिताए वो दिन, जो शिक्षा प्राप्त की होती है, जो दोस्त होते हैं, जो शिक्षक होते है, यह जो कालेज है वह सपनों का बाजार है, यहां पर जब कोई बच्चा अपना दाखिला कराने के लिए आता है तो उसके मन में कई तरह के विचार होते हैं। कोई डाक्टर, कोई इंजीनियर, कोई अच्छा शिक्षक बनना चाहता है। यहां पर जब बच्चा आता है तो गुरूजनों के सहयोग से कुछ लोग जो सोचकर आए होते वह बन जाते हैं और कुछ लोग नहीं बन पाते। मगर फिर भी यह ऐसी जगह है यहां कुछ न कुछ बनकर ही निकलते हैं।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि वह भी यहां का विद्यार्थी रहे हैं और उन्होंने 1968 में 10वीं की थी और माता-पिता ने यहां एसडी कालेज में भेजा था। वह सामान्य विद्यार्थी थे, मगर वह कभी फेल नहीं हुए। वह खाली मन से इस कालेज में आए थे और उन्हें नहीं पता था कि वह भविष्य में क्या बनेंगे, न ही उनकी कोई इच्छा था। आज वह जहां है उन्होंने कभी नहीं चाहा था कि वह इस क्षेत्र में आए। यहां गणित के प्रोफेसर गोपाल कृष्ण थे जिनका सबके साथ संपर्क था, उन्होंने क्यों उन्हें छांटा यह उन्हें नहीं पता और वह उन्हें संघ की शाखा में ले गए। फिर वह कालेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महासचिव रहे। यहां से निकलने के बाद भी वह उस संगठन के अलग-अलग अंगों में काम करने का अवसर मिला। चुनाव आते थे उनमें भी वह सक्रिय तौर पर काम करते थे। 1990 में सुषमा स्वराज जी राज्यसभा में चली गई और वह ग्रीन ब्रिगेड का समय था।
उस समय यहां से चुनाव लड़ना एक चुनौती जैसा था। तब उन्हें आदेश दिया गया कि आप बैंक की नौकरी से रिजाइन कर चुनाव लड़ो। उन्होंने तब रिजाइन किया और चुनाव लड़ा तथा वह जीते भी। मगर वह इस लाइन में आना नहीं चाहते थे। उन्होंने इसपर पंक्तियां गुनगुनाई “निकले थे कहाँ जाने के लिए, पहुँचे हैं कहाँ मालूम नहीं, अब अपने भटकते क़दमों को, मंज़िल का निशाँ मालूम नहीं”। जहां भी उन्हें जिन परिस्थितियों में खड़ा होना पड़ा उन्होंने पीठ नहीं दिखाई। उन्होंने कहा इस शहर में जन्में, इस शहर की हवा खाई, यहीं पर पढ़ाई की, इस शहर का कर्जा है उनपर और वह सौ जन्म भी लें तो उतार नहीं सकते। इस अवसर पर डॉ. विजय शर्मा, कॉलेज की प्राचार्या डॉ अलका शर्मा, डॉ देश बंधु, दिनेश सेठी, रमित सालवान, डॉ. सुशील कंसल, हरिंदर सिंह, मधुसूदन टंडन, एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. देश बंधु, उपाध्यक्ष डॉ. विनय मल्होत्रा, महासचिव डॉ. विजय शर्मा तथा सचिव डॉ. आरती अरोड़ा आदि मौजूद रहे।

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