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भारत की एआई नीति शासन-प्रधान,नागरिक-केंद्रित और विकासोन्मुख है : कार्तिकेय शर्मा

कलम बाण नई दिल्ली
संदीप सिंह : BRICS चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित यूथ एंड AI पॉलिसी लैब – केस स्टडी चैलेंज, जो कि AI इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-इवेंट है, को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि भारत की AI नीति “शासन-प्रधान, नागरिक-केंद्रित और विकासोन्मुख” है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दृष्टि से प्रेरित है।राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि भारत अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर केवल संभावनाओं पर चर्चा नहीं कर रहा, बल्कि उसे कानून, सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना और सुविचारित नीतिगत ढांचे के माध्यम से संस्थागत स्वरूप दे रहा है। यह दृष्टिकोण विश्वास, समावेशन और व्यापक जनहित पर आधारित है। उन्होंने कहा“भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता नैतिक, समावेशी और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अनियंत्रित प्रयोगों के बजाय कानून, विश्वास और लोककल्याण पर आधारित AI मॉडल को अपनाया है।”
अपने संबोधन में शर्मा ने भारत के AI इकोसिस्टम के तीन आधारभूत स्तंभों को रेखांकित किया। पहला, डेटा पर सार्वजनिक विश्वास और कानूनी जवाबदेही, जिसे Digital Personal Data Protection Act, 2023 के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है। यह कानून डेटा उपयोग के लिए सूचित सहमति, उद्देश्य की स्पष्टता और दुरुपयोग के मामलों में उत्तरदायित्व तय करता है।दूसरा, राष्ट्रीय क्षमता निर्माण, जिसके अंतर्गत IndiaAI Mission को ₹10,300 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ स्वीकृति दी गई है। तीसरा, जनसंख्या-स्तर की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, जिसमें Aadhaar, UPI, DigiLocker और Ayushman Bharat Digital Mission जैसे प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं। ये प्रणालियाँ नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के साथ बड़े पैमाने पर AI अनुप्रयोगों को संभव बनाती हैं।

शर्मा ने कहा कि भारत में AI का उपयोग अब ठोस और मापनीय सामाजिक परिणाम दे रहा है। डिजिटल स्वास्थ्य, भुगतान, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में AI आधारित समाधानों ने पहुंच बढ़ाई है और सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाया है।
नमो शक्ति रथ: AI का मानवीय और जिम्मेदार अनुप्रयोगअपने संबोधन में कार्तिकेय शर्मा ने नमो शक्ति रथ पहल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना इस बात का व्यावहारिक उदाहरण है कि AI को सामाजिक संवेदनशीलता, संस्थागत जवाबदेही और मानवीय गरिमा के साथ कैसे लागू किया जा सकता है।

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