सीएससी ग्रामीण भारत का डिजिटल प्रवेश द्वार : मोहन लाल बड़ौली
नायब सरकार डिजिटल और नवाचार को निरंतर बढ़ावा दे रही है : बड़ौली
कलम बाण पंचकूला
नरेश सरोहा : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि सीएससी केवल एक सेवा केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत का डिजिटल प्रवेश द्वार है। उन्होंने कहा कि मोदी और नायब सरकार की योजनाओं का सीएससी के माध्यम से सीधा लाभ ग्रामीणों तक पहुंच रहा है। सीएससी को परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए श्री बड़ौली ने कहा कि डिजिटल हरियाणा मिशन को साकार करने में सीएससी नेटवर्क की प्रभावशाली भागीदारी रही है। उन्होंने कहा कि सीएससी सेवा केंद्र रोज़गार का आधार तथा ग्रामीण स्तरीय नेतृत्व का स्रोत और डिजिटल समावेशन का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। श्री बड़ौली मंगलवार को पंचकूला स्थित पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह में आयोजित सीएससी डिजिटल समावेशन के 16 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, खेल एवं युवा मंत्री गौरव गौतम और सीएससी कार्यक्रम के राज्य प्रमुख आशीष शर्मा मौजूद रहे। इस अवसर पर हरियाणा में डिजिटल सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सीएससी संचालकों को सम्मानित भी किया गया।
मोहन लाल ने कहा कि हरियाणा के सभी 22 जिलों की ग्राम पंचायतें सीएससी नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं। 3000 से अधिक महिला वीएलई डिजिटल उद्यमिता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीएससी के माध्यम से चाहे वो जाति, निवास व आय प्रमाण पत्र हो या फिर पैन कार्ड, पासपोर्ट, आयकर रिटर्न, वृद्धावस्था, विधवा और विकलांग पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, बिजली-पानी बिल भुगतान, किसान क्रेडिट कार्ड, परिवार पहचान पत्र जैसी अनेकों योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है।
बडौली ने कहा कि सीएससी के जरिए हरियाणा की महिलाएं डिजिटल उद्यमी बनकर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। महिलाएं स्वयं भी कमाई कर रही हैं और अन्य युवाओं को भी रोज़गार के अवसर दे रही हैं। कोरोना के समय सीएससी की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण रही है। कोरोना के दौरान जब पूरी दुनिया ठहर गई थी, तब भी हरियाणा के सीएससी केंद्र ग्रामीणों के लिए आशा की किरण बने रहे। वैक्सीनेशन के लिए पंजीकरण, आरोग्य सेतु ऐप की जानकारी और राशन वितरण जैसी सेवाएं लोगों को मिलती रही।




